It's kind of a ghazal...i wrote this recently.It's not complete...wish to add something to it...Letz see how it turns out...
हर ग़म में हमने खुशियों को ढूंढा हैं,
हर दर्द में मुहब्बत को छुपा पाया है,
जिसे आप दुख की काली रात समझ बैठे हैं ,
यकीन मानिये वो आने वाली खुशियों का साया है....
कभी किसी का दर्द बांटा है तुमने?
कभी किसी रोते बच्चे को हँसाया है?
जब भी हमने ये कोशिश की है
अपनी बेचैनी को भूले हैं,बहुत सुकून पाया है....
वो अकेला था,लोग उसे "यतीम" कहते थे
और हमने तो खुद को भीड़ में भी अकेला पाया था
उसका हाथ थामा तो ये समझ ना आया
उसने हम में ,या हमने उसमें अपना रहनुमा पाया है...
यूँ दूर से मेरे बारे में तू क्या जानेगा?
दिल पे हाथ तो रख,तो तू पिघल जायेगा...
साहिल पे तो बस पत्थर नज़र आते हैं,
जो समंदर में उतरे हैं,मोती उन्होंने ही पाया है....
तूने कभी मुझे तन्हा होने न दिया
तेरी यादों ने हरपल मेरा साथ निभाया है
हमने तो तुझे दिल से कभी निकला ही नहीं,
क्या तूने भी दिल के किसी कोने में हमें छुपाया है ?
वक़्त के बदलने से कुछ चीजे नहीं बदलीं ,
नाम बदल गए,पर रिश्तों की जंजीरें नहीं बदलीं
उपर वाले ने भी ये क्या खेल रचाया है
तू कल मेरा हमसफ़र था ,तू आज मेरा हमसाया है...
मेरी रगों में बहता खून उसका है
कितनी ही रातों को उसने मुझे थपकियाँ देकर सुलाया है,
जब भी कोई बुरा वक़्त मेरी ज़िन्दगी में आया है
मेरी माँ की दुआओं ने मुझे बचाया है....
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