Tuesday, October 13, 2009
Havent Decided The Title Yet
हमारी कोई खता हो तो कहो,
हमसे कोई गिला हो तो कहो,
मुस्कुराया करो ,मुस्कराहट अच्छी है तुम्हारी,
यूँ दूर दूर से, यूँ खामोश न रहो ...
माना कि मैं तेरा अजीज़ नहीं हूँ ,
और दोस्तों की तरह तेरे करीब नहीं हूँ ,
इक बार तबियत से हमें अपना दोस्त तो कहो
यूँ दूर दूर से, यूँ खामोश न रहो .....
आँखों में जो चमक है बच्चों सी जो हंसी है,
इस नकली दुनिया में, ये बहुत कीमती हैं
दुनिया की तल्ख़ नज़रों से इन्हें बचा के रखो
यूँ दूर दूर से, यूं खामोश ना रहो
मुश्किल है इस दुनिया में अकेले जी लेना,
हर दर्द को सहना ,हर आंसू को पी लेना
मुझसे ना सही,पर "अपनों" से तो कहो,
यूँ दूर दूर से,यूँ खामोश ना रहो
माना जगह नयी है ,रिवाज़ हैं नए
हैं लोग कुछ अलग से ,अंदाज़ हैं नए
उस अनजानी सी भीड़ में इक नया दोस्त ढूंढ़ लो ,
यूँ दूर दूर से,यूँ खामोश न रहो...
खुशियों के पल है छोटे ,ग़म के पल बड़े
वो हंसी ही क्या जिसमे माथे पे शिकन पड़े
खुल के हंसा करो, हरपल "Perplexed" ना रहो,
यूँ दूर दूर से ,यूँ खामोश न रहो....
हर राह की मंजिल है,तुम आगे तो बढो,
हर कश्ती का साहिल है,तूफां से ना डरो,
मंजिल तुम्हे मिलेगी खुद पर यकीं करो
यूं दूर दूर से,यूँ खामोश ना रहो...
ये महज़ अल्फाज़ नहीं मेरी दुआ है
तुम भूल भी जाओ इन्हें,तुमसे ना गिला है
दोस्त न कहो,पर "wellwisher" तो कहो
यूँ दूर दूर से यूँ खामोश न रहो ......
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment